" आपका ज्योतिष एवं वास्तु से सम्बंधित इस ब्लॉग पर स्वागत है - " आचार्य रंजन

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Sunday, December 27, 2009

*यज्ञोपवित को नियमित रूप से शुद्ध/ससक्त करने का मन्त्र *

    जनेऊ  या  यज्ञोपवित  को  नियमित  रूप  से  शुद्ध/ससक्त   करने  हेतु   निम्न  मन्त्र  का  उच्चारण  करें  -
       ॐ  यज्ञोपवितम  परमं  पवित्रं   प्रजा-पतेर्यत -सहजं  पुरुस्तात  !
           आयुष्यं   अग्र्यं  प्रतिमुन्च  शुभ्रं  यज्ञोपवितम  बलमस्तु  तेजः  !!
        इसके  पश्चात  गायत्री  - मन्त्र  का  कम  से  कम  ११  बार  उच्चारण   करते  हुए  जनेऊ   या  यज्ञोपवित   को  शुद्ध  / सशक्त   करें  !
  -  आचार्य  रंजन -- ज्योतिषाचार्य  एवं वास्तु  विशेषज्ञ   सह   निदेशक  "  महर्षि  भृगु  ज्योतिष  संस्थान ,  बेगुसराय

Sunday, December 20, 2009

* यज्ञोपवित या जनेऊ धारण करने हेतु मन्त्र *


        जनेऊ  या  यज्ञोपवित  धारण  के  पूर्व   स्वयं  को  पहले  स्नान   के  उपरांत   शुद्ध   कर लेने  के  पश्चात  अपने   दोनों  हाथों  में चित्रानुशार   लेकर  निम्न  मन्त्र  का  उच्चारण  करें  -
       ॐ  यज्ञोपवितम  परमं  पवित्रं   प्रजा-पतेर्यत -सहजं  पुरुस्तात  !
           आयुष्यं   अग्र्यं  प्रतिमुन्च  शुभ्रं  यज्ञोपवितम  बलमस्तु  तेजः  !!
           यग्योपवितमसी   यज्ञस्य  त्वाय  यज्ञोपवितम   तेनोपन्ह्यामी  !! "
     इसके  पश्चात  गायत्री  - मन्त्र  का  कम  से  कम  ११  बार  उच्चारण   करते  हुए  जनेऊ   या  यज्ञोपवित   धारण  करें  !
  -  आचार्य  रंजन -- ज्योतिषाचार्य  एवं वास्तु  विशेषज्ञ   सह   निदेशक  "  महर्षि  भृगु  ज्योतिष  संस्थान ,  बेगुसराय

Saturday, December 19, 2009

~ स्वयं को शुद्ध करने हेतु मन्त्र ~


     स्वयं  को  शुद्ध  करने  हेतु  अपने  दाहिने   हाथ   में  कोई  भी  ताज़ा  जल  या  जल   लेकर   निम्न  मन्त्र   का  उच्चारण   करें   ,  इसके  पश्चात   आप  कोई   भी  यज्ञ   इत्यादि  कर  सकते  हैं
मंत्र      


            " ॐ  अपवित्रः   पवित्रो  वा  सर्वावस्थां  गतो-अपि  वा !
             यः  स्मरेत  पुन्डरिकाक्षम  स  बाह्याभ्यंतरः    शुचिः  !!

इसके  बाद  उस  जल  को  अपने  ऊपर  छिरक  /  छींट  लें       --  आचार्य   रंजन

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